रिपोर्ट- अंकित बाराबंकी उत्तर प्रदेश। तहसील सिरौलीगौसपुर के अन्तर्गत सरयू नदी के किनारे स्थित समर्थ साईं जगजीवन साहेब की जन्मभूमि सरदहा...
रिपोर्ट- अंकित
बाराबंकी उत्तर प्रदेश। तहसील सिरौलीगौसपुर के अन्तर्गत सरयू नदी के किनारे स्थित समर्थ साईं जगजीवन साहेब की जन्मभूमि सरदहा में एक विशाल भंडारे का आयोजन किया गया जिसमें हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण करके अपनी सुख समृद्धि की कामना किया।
समर्थ साईं जगजीवन साहब का जन्म सरयू नदी के किनारे सरदहा गांव में विक्रमी संवत 1727 माघ मास की शुक्ल पक्ष सप्तमी तिथि को हुआ था बालेपन से ही साहेब समाज सुधारक और विचित्र ज्ञान वाले संत थे धीरे धीरे साहेब जगजीवन दास बड़े होने लगे इनके पिता का नाम गंगाराम एवं माता का नाम केवला देवी था जैसे जैसे जगजीवन साहेब की उम्र बढ़ती गई वैसे वैसे ज्ञान भी बढ़ता गया धीरे धीरे संत शिरोमणि ने कोटक बन में आकर कर तपस्या किया जिसे कोटवाधाम के नाम से जाना जाता है ।
संत शिरोमणि साहेब जगजीवन दास के बड़े पुत्र शोभा दास जी भी संत थे एक बार किसी की गाय मर गई थी उसको उन्होंने जिंदा कर दिया तभी से शोभा दास साहब कोटवाधाम से आकर अपने गांव सरदहा में रहने लगे वहीं पर उनकी समाधि बनी हुई है।
सरदहा कई वर्ष पूर्व कटकर नदी में समा चुका है उस स्थान को आज बाबा शोभा दास की कुटी के नाम से जाना जाता है यहां पर विगत कई वर्षों से भंडारे का आयोजन होली के सातवें दिन किया जाता है जिसमें उन्नाव लखीमपुर सीतापुर गोंडा बहराइच अयोध्या रायबरेली जैसे विभिन्न जनपदे से हजारो की संख्या मे भक्त आते हैं और प्रसाद ग्रहण करते हैं माथा टेकते हैं यथा शक्ति दान भी करते हैं।भन्डारे का आयोजन महन्त नीलेन्द्र बक्श दास उर्फ नीरज भइया ने किया ।जिसमें प्रेमदास पूर्व विधायक राजलक्ष्मी वर्मा पूर्व प्रमुख विवेकानंद पान्डेय प्रमोद कुमार रावत अनूप दास नागेन्द्र प्रताप सिंह सुरेशचंद्र तिवारी मयंक बाजपेयी जय कुमार दीक्षित सहित क्षेत्र के दर्जनों सत्यनामी कार्यकर्ताओं ने दूरस्थ से आये श्रद्धालुओ का स्वागत कर भंडारा प्रसाद ग्रहण कराया।

COMMENTS