डॉ o दिलीप कुमार झा ,पत्रकार ,गोड्डा झारखंड । दिनांक 22/3/2026 गोड्डा । आज जहां ब्राह्मणों की उपेक्षा जाति विरोध की नफरत से प...
डॉ o दिलीप कुमार झा ,पत्रकार ,गोड्डा झारखंड ।
दिनांक 22/3/2026
गोड्डा । आज जहां ब्राह्मणों की उपेक्षा जाति विरोध की नफरत से पीड़ित है वही राजनीतिक सरकारी उपेक्षा का भी शिकार हो रही है । ऐसे वक्त में इस संगठन का दायित्व और अपने अस्तित्व को बचनेवके लिए अपनी परंपराओं और संस्कृति को जीवित रखने का एक प्रयास है । इस संगठन द्वारा उपनयन संस्कार समारोह का आयोजन और समाज के निर्धन बच्चों को आगे बढ़ाने और अपनी परंपराओं को जीवित रखने का दायित्व भी आज के बुद्धिजीवी वर्ग पर ही निर्भर है ।
कठिन प्रयासों और संघर्षों के बाद आज यह परिषद गर्व से अपनी ललाट पर मिथिला के महान कवि लेखक कोकिल कवि विद्यापति का एक टीका लगा कर देश विदेश से लेकर स्थानीय समाज को एक संदेश दे रही है चंदन का टीका ललाट पर ही सुशोभित होता है गर्व से मस्तक ऊंची कर आज चमक रहा है ।
विद्यापति प्रतिमा का अनावरण सेवानिवृत उपायुक्त गोड्डा के पूर्व जिला विकास पदाधिकारी दिलीप कुमार झा के कर कमलों द्वारा किया गया । सर पर मिथिला संस्कृति की पहचान पाग पहने चंदन टीका लगाए सारे उपस्थित समाज एक अलग ही वातावरण को अद्भुत बिहांगम दृश्य को प्रस्तुत कर रहे थे ।
महान शिव भक्त कोकिल कवि विद्यापति का जन्म तो बिहार के मधुबनी जिले के बिस्फी ग्राम में 1352, 14वि शताब्दी में हुआ था और उनका महाप्रयाण 15वि शताब्दी में हुआ था । वो मिथिला नरेश के प्रमुख सचिव के रूप में नियुक्त थे बाद में उनका जीवन लेखन संगीत भक्ति गायन में बीता, ऐसा लिखा गया है कि शिव के इतने बड़े भक्त थे कि उनके घर पर ब्रम्हांड नायक शंकर भगवान उगना नौकर के रूप में की उनकी सेवा की लेकिन पत्नी की प्रताड़ना और कवि के साथ शर्त के मुताबिक वो उन्हें छोड़कर चले गए ।उनकी याद में भावुक कवि ने एक रचना रच डाली और बड़े ही करुणा के साथ उसे गाया है - उगना रे मोर कते गेला, कातया गेला शिव कीदहू भेला ।
जब भक्ति भाव और संगीत दोनों का सम्मिश्रण हो जाता है तो भगवान को भी भक्त के पास आना पड़ता है इसी विश्वास और श्रद्धा पर हमारी सनातन सभ्यता संस्कृति टिकी है । मैथिल और मिथिला भाषा इतनी मीठी और कर्णप्रिय है कि दो लोग औरतें अगर आपस में लड़ रही हैं तो भाव भंगिमा को छोड़ दें तो आप समझ नहीं पाएंगे कि ये लोग लड़ रहे या नहीं ।मैथिल कवि विद्यापति ने पदावली,कीर्ति लता और कीर्ति पताका अवहट्ट भाषा में श्रीकृष्ण के प्रेम श्रृंगार रस की रचना की ,भू परिक्रमा ,पुरुष परीक्षा ,लिखनवाली, शेव सर्वस्व सार ,और कई भक्ति गान की भी रचनाएं की । मुख्य अतिथि बने श्री झा ने एक भक्ति गान प्रस्तुत कर श्रोताओं को भक्ति भाव में झूमते हुए सिर हिलाने पर मजबूर किया । बच्चों द्वारा भी रंगमंच पर भक्ति भजन गाए गए ।कार्यक्रम में नव नियुक्त वार्ड पार्षद गुनानंद झा ,बच्चू झा ,ध्यान झा अपनी पत्नियों के साथ उपस्थित हुए , नगर उपाध्यक्ष पूजा देवी पति अशोक तिवारी उर्फ मुन्ना तिवारी ,,श्यामा कांत झा ,दिन नाथ झा ,संजीव आनंद ,परमानंद चौधरी ,सुनील झा ,पवन झा ,राजेश झा पूर्व भाजपा अध्यक्ष ,सुशील कुमार झा अध्यक्ष बार एसोसिएशन,नंदन ठाकुर ,सुधीर ठाकुर ,प्राणधन चौधरी ,माधव चंद्र चौधरी ,पारितोष पाठक ,नन्द किशोर झा ,विधुकर झा ,हरिशंकर मिश्र ,निश्चल कुमार चौधरी ,मृत्युंजय झा ,नर्मदेश्वर झा ,नर्मदेश्वर झा ,
, आदि मुख्य रूप से उपस्थित थे जबकि कार्यक्रम के मुख्य कार्यकर्ता के रूप में सक्रिय भूमिका में विद्यापति परिषद के संवाहक एडवोकेट सर्वजीत झा थे और कार्यक्रम के संचालक के रूप में सुरजीत झा जो विभिन्न खेलों और सांस्कृतिक संस्थाओं के सदस्य हैं और कार्यक्रम संचालक के रूप में उनकी ख्याति है उन्होंने ये दायित्व इस कार्यक्रम में बखूबी निर्वाह किया ।
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