डॉ ० दिलीप कुमार झा पत्रकार न्यूज झारखंड प्रभारी । दिनांक —24/05/2026 गुलामी की जंजीरों को तोड़ने में जितनी शहादते हुई ,कितने दे...
डॉ ० दिलीप कुमार झा पत्रकार न्यूज झारखंड प्रभारी ।
दिनांक —24/05/2026
गुलामी की जंजीरों को तोड़ने में जितनी शहादते हुई ,कितने देश प्रेमियों ने तिल तिल कर अपने प्राणों की आहूति दी शायद ही कोई दिन हो जिस दिन किसी वीर शहीदों की जयंती और पुण्यतिथि न मनाते हों ,वो कोई अपराधी नहीं वो देशभक्ति और गुलामी की जंजीरों को तोड़कर अंग्रेजों की दासता से इस देश को मुक्त कराना चाहते थे ।हजारों लाखों क्रांतिकारी अपनी जीवन की परवाह न करते हुए उस मुक्ति आंदोलन में कूद पड़े । आपसी अंतर्कलह सत्ता की लालच में देश के टुकड़े हुए पाकिस्तान जैसे देश का जन्म हुआ जो भारत की धरती को भारत से अलग कर स्वतंत्र देश बनी । अंग्रेजों का षडयंत्र सफल हुआ भारत को कमजोर करने की कई नीतियां बनाई गई । लाखों हिंदुओं की बलि पड़ी बेघर हुए कुछ लापता हो गए । कुछ मुस्लिमों को भी जान गंवानी पड़ी लेकिन भारत को धर्म निरपेक्ष देश बना कर सभी धर्मों के लिए द्वार खोल दिए गए । फिर बंटवारे का क्या औचित्य रहा ये किसी की समझ में नहीं आज तक आया ।कपड़े की थान भी गई और गज का टुकड़ा भी चला गया । उस बंटवारे में हिंदुओं के साथ किसने धोखाघढ़ी की ।जो इस देश का नायक था उसने तो 1943 में ही अंडमान निकोबार में राष्ट्रीय ध्वज फहरा कर देश के आजादी की घोषणा कर दी थी वो सुभाष चंद्र बोस गुमनामी में खो गए और 4 वर्षों तक खिचड़ी पकती रही कैसे हिंदुस्तान को आजाद किया जाए ।और जिस तरह से देश को आजाद घोषित किया गया उससे अच्छा था ये देश आजाद ही नहीं होता ।गांधी जी और कांग्रेस जवाहर लाल के साथ जिन्ना की तिगड़ी ने मिलकर हर उन शर्तों को मान लिया जो देश आजादी के नाम पर जर्जर हालत में हिन्दू मुस्लिम के संघर्ष के साथ देश को टुकड़े कर मुस्लिम तुष्टिकरण कर पाकिस्तान और पूर्वी पाकिस्तान बन कर तैयार हो गया लेकिन उस वक्त बहुत बड़ी भूल कहें या सत्ता की प्राप्ति में अंधे हुए लोग इस देश को धर्म निरपेक्ष बना कर फिर एक बार मुस्लिम क्रिश्चियन बौद्ध जैन धर्मो के लिए हिंदुओं के देश में इन्हें घुसने का मौका दे दिया गया ये सबसे बड़े ऐतिहासिक भूल का एक नमूना है । देश के नेताओं ने भी शायद ये कल्पना नहीं की थी कि उनके साथ इतना बड़ा छल होगा ।संविधान लिखने वाले तो सिर्फ एक क्लर्क थे उन्हें जो मसौदा दिया गया उन्होंने उसे सिर्फ लिपिबद्ध किया । जम्मू कश्मीर पर धारा 370, 35/A लगाकर उसे स्वतंत्र देश का दर्जा देना भी सत्तालोलुपता का एक उदाहरण है । फिर पाकिस्तान को 62 अरब रुपए की सहायता देना ये भी देश को कमजोर करने की साजिश थी नेहरू जी लार्ड माउंटबेटन की पत्नी के साथ ज्यादा मस्त थे इधर गांधी जी भी राष्ट्रपिता बनकर देश के पिता होना चाहते थे ।
अब आप सोचिए नेताजी सुभाष चंद्र बोस सबसे बड़े बाधक थे इन सब के लिए जो देश के स्वतंत्र होने की घोषणा 1943 में ही कर चुके थे चार व्यक्ति पूरे देश पर भारी पड़ा जो नेता जी को अपने रास्ते से हटाना चाहते थे ये उनकी रणनीति थी राजनीति नहीं । जिस मुगल साम्राज्य को नेस्तनाबूद कर अंग्रेजों ने 300 वर्ष तक शासन किया और मुगल सम्राट के अंतिम बादशाह बहादुर शाह जफर को भारत छोड़ने के लिए मजबूर कर दिया वर्मा में जाकर अपनी शेष जिंदगी बसर की और मृत्यु को प्राप्त हुए ।
अब देखिए मुगल शासन भी खत्म था अंतिम बादशाह भी भारत से बाहर यानि हिंदुस्तान से मुगल साम्राज्य की समाप्ति और बेदखल कर दिए गए । अब आई राजनीति की षड्यंत्रकारी मंसूबे , अंग्रेजों ने अब देख लिया सत्ता उनके हाथ से जा रही है वो भय सुभाष चंद्र बोस का भय था अंग्रेजों में ,न जवाहर के आंदोलन का भय था न गांधी का । नेता जी षडयंत्र के शिकार हुए या उनकी प्लेन में आग लगने से मृत्यु हुई ये रहस्य आज भी करोड़ो भारतीयों के दिल को कुरेदता है । अनजान सफर या अनजान राहें कहां गए क्या उनकी अंतिम परिणीति थी ये रहस्य ही रह गया ।
ये जब कनफर्म हो गया रास्ते का कांटा खत्म हो गया तब हिंदुस्तान के आजादी की घोषणा की जाएगी ,हिन्दू बहुल देश में जिन्ना को प्रधानमंत्री का पद देना विरोध और विद्रोह दोनों झेलना पड़ता लेकिन जिन्ना के लिए पाकिस्तान और जवाहरलाल के लिए धर्म निरपेक्ष हिंदुस्तान जबकि इस देश में उस वक्त 80% से भी ज्यादा हिंदू थे जिसने इस कटी फटी हालत में मिले हिंदुस्तान को स्वीकार किया ।
आज देश में लोकतंत्र के नाम पर धनतंत्र और शक्ति तंत्र के साथ चुनाव में हिस्सा लेना चुनाव जीतना सत्ता के साथ जुड़कर देश की धनराशि को दोनों हाथों से लूटना योजनाओं के नाम पर कमीशन खोरी ,लूट हत्या अपराध का बाजार गर्म जिसमें जन सेवक प्रतिनिधियों का कहीं न कहीं उनका आशीर्वाद रहता है उनके गुर्गों को तनख्वाह मिलती है बगैर किसी कार्य के उन्हें पेंशन मिलती है जिंदगी भर के लिए अकूत संपत्ति जमा करने का लाइसेंस उन्हें मिल जाता है क्या मजाल कि कोई जांच एजेंसी इनके घर जाने की हिम्मत करे अपने सगे संबंधियों जाति के लोगों की सेवा लेकिन धन लेकर जैसा कि रेलवे में नौकरी के नाम पर लालू जी पर संपत्ति हस्तांतरित किया गया उसमें अभी केस चल रहे हैं नैतिकता का कोई मोल नहीं हत्यारे चरित्रहीन बलात्कारी अपहरणकर्ताओं का दौर अभी चल पड़ा है नागरिकों के पास आखिरी रास्ता तो सिर्फ जनांदोलन है । लोकतंत्र की चटनी और संविधान का आचार हमलोग आज चाट रहे हैं और आगे भी चाटते ही रहेंगे ।
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