अनन्त कुमार/संतोष सिंह हैदरगढ़ बाराबंकी। पूरे प्रदेश की सियासत मे अपना प्रभाव रखने वाले स्व0 पंडित सुरेन्द्र नाथ अवस्थी उर्फ पुत्तू भैया आ...
अनन्त कुमार/संतोष सिंह
हैदरगढ़ बाराबंकी।
पूरे प्रदेश की सियासत मे अपना प्रभाव रखने वाले स्व0 पंडित सुरेन्द्र नाथ अवस्थी उर्फ पुत्तू भैया आज अपनी दसवीं पुण्यतिथि पर एकत्रित हुए लोगों के आंसू भरे नयनों में जीवित हो उठे। भावनाओं के समुद्र के बीच सभी ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की तथा उनके द्वारा रोपे गये शिक्षा रूपी वृक्ष को पुष्पित पल्लवित करने में अवस्थी परिवार को जीवन पर्यन्त सहयोग देने का संकल्प लिया।
हैदरगढ़ की माटी के लाल व शिक्षा के अग्रदूत पंडित सुरेन्द्र नाथ अवस्थी पुत्तू भैया आज तीन फरवरी को बहुत याद आये। उनकी दसवीं पुण्यतिथि पर ग्राम्यांचल शिक्षा संकाय से लेकर एसएन अवस्थी मेमोरियल अस्पताल तक खूब लोग इकट्ठा हुए। इस आयोजन में राजनैतिक दुराभाव दूर था सही कहा जाये तो यहां जो भी इकट्ठा हुआ था वह मानवीय सभ्यता का हस्ताक्षर बना हुआ नजर आया। सर्वप्रथम ग्राम्यांचल परिवार की मुखिया प्रेमा अवस्थी ने एसएन अवस्थी अस्पताल पहुंचकर उनके भव्य चित्र पर माल्यार्पण किया। इसके बाद वे अपने पुत्र शरद अवस्थी, आशुतोष अवस्थी एवं सिद्धार्थ अवस्थी तथा बेटी श्वेता मिश्रा व परिवार के साथ ग्राम्यांचल स्थित स्मृति वाटिका में पहुंची। यहां पर उन्होंने पूरे परिवार के साथ स्व0 अवस्थी जी की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया तथा उनके चरणों में श्रद्धा सुमन के पुष्प अर्पित किये। इस मौके पर शांति पूजन हुआ एवं 21 ब्राह्मणों को विभूषित भी किया गया। इस मौके पर सुन्दरकाण्ड पाठ का भी आयोजन किया गया। आयोजित शोक सभा में बोलते हुए श्रीमती प्रेमा अवस्थी ने रुंधे गले से कहा कि मेरे लिए उनके बिना हर पल कठिन है। लेकिन यह उनका आर्शीवाद ही है कि आज भी ग्राम्यांचल परिवार तथा उनके द्वारा स्थापित किये गये मापदंड और विकासोन्नमुख हो इसके प्रयास भी जारी हैं। उन्होंने कहा कि वे एक बड़ा परिवार मुझे सौंपकर गये हैं उसकी देख रेख करना मेरा कर्तव्य है। उन्होंने आये हुए सभी जनों का अभिवादन व आभार व्यक्त किया।
प्रसिद्ध कवि रामेश्वर द्विवेदी प्रलयंकर ने कहा कि मेरी स्व0 अवस्थी जी से जब भी मुलाकात हुई उनसे बहुत कुछ सीखने को मिला। श्री द्विवेदी ने इस मौके पर स्व अवस्थी जी लिखी कविता भी पढ़ी।वरिष्ठ कवि डॉ रामबहादुर मिश्र ने कहा कि उन्होंने विकास के क्षेत्र में इतने काम किये हैं कि वे हमेशा हमारे बीच में विद्यमान रहेंगे।माताबख़्स सिंह व यमुना प्रसाद तिवारी तथा सरवर सिद्दीकी ने अवस्थी जी से जुड़े संस्मरण सुनाए। इस मौके पर सिद्धार्थ अवस्थी सिद्धू भैया ने कहा कि मेरे पिता जी भले ही इस दुनिया में न हो लेकिन मैं उन्हें आस-पास ही महसूस करता हूं। उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि तब होगी जब हम सभी मिल करके उनके द्वारा दिखाये गये रास्ते पर चलें वह भी एकजुटता के साथ। स्वर्गीय सुरेंद्र नाथ अवस्थी जी के पोते विश्रुत अवस्थी ने कहा कि मुझे आप सभी का आर्शीवाद चाहिए जिससे मैं अपने बाबा जी के सपनों को साकार कर सकूं। सामाजिक कार्यकर्ता कृष्ण कुमार द्विवेदी राजू भैया ने कहा कि अवस्थी जी जैसे लोगो का केवल जन्म होता है उन जैसे महा इस मौके पर प्रमुख रूप हैदरगढ़ बाराबंकी।
पूरे प्रदेश की सियासत मे अपना प्रभाव रखने वाले स्व0 पंडित सुरेन्द्र नाथ अवस्थी उर्फ पुत्तू भैया आज अपनी दसवीं पुण्यतिथि पर एकत्रित हुए लोगों के आंसू भरे नयनों में जीवित हो उठे। भावनाओं के समुद्र के बीच सभी ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की तथा उनके द्वारा रोपे गये शिक्षा रूपी वृक्ष को पुष्पित पल्लवित करने में अवस्थी परिवार को जीवन पर्यन्त सहयोग देने का संकल्प लिया।
हैदरगढ़ की माटी के लाल व शिक्षा के अग्रदूत पंडित सुरेन्द्र नाथ अवस्थी पुत्तू भैया आज तीन फरवरी को बहुत याद आये। उनकी दसवीं पुण्यतिथि पर ग्राम्यांचल शिक्षा संकाय से लेकर एसएन अवस्थी मेमोरियल अस्पताल तक खूब लोग इकट्ठा हुए। इस आयोजन में राजनैतिक दुराभाव दूर था सही कहा जाये तो यहां जो भी इकट्ठा हुआ था वह मानवीय सभ्यता का हस्ताक्षर बना हुआ नजर आया। सर्वप्रथम ग्राम्यांचल परिवार की मुखिया प्रेमा अवस्थी ने एसएन अवस्थी अस्पताल पहुंचकर उनके भव्य चित्र पर माल्यार्पण किया। इसके बाद वे अपने पुत्र शरद अवस्थी, आशुतोष अवस्थी एवं सिद्धार्थ अवस्थी तथा बेटी श्वेता मिश्रा व परिवार के साथ ग्राम्यांचल स्थित स्मृति वाटिका में पहुंची। यहां पर उन्होंने पूरे परिवार के साथ स्व0 अवस्थी जी की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया तथा उनके चरणों में श्रद्धा सुमन के पुष्प अर्पित किये। इस मौके पर शांति पूजन हुआ एवं 21 ब्राह्मणों को विभूषित भी किया गया। इस मौके पर सुन्दरकाण्ड पाठ का भी आयोजन किया गया। आयोजित शोक सभा में बोलते हुए श्रीमती प्रेमा अवस्थी ने रुंधे गले से कहा कि मेरे लिए उनके बिना हर पल कठिन है। लेकिन यह उनका आर्शीवाद ही है कि आज भी ग्राम्यांचल परिवार तथा उनके द्वारा स्थापित किये गये मापदंड और विकासोन्नमुख हो इसके प्रयास भी जारी हैं। उन्होंने कहा कि वे एक बड़ा परिवार मुझे सौंपकर गये हैं उसकी देख रेख करना मेरा कर्तव्य है। उन्होंने आये हुए सभी जनों का अभिवादन व आभार व्यक्त किया।
प्रसिद्ध कवि रामेश्वर द्विवेदी प्रलयंकर ने कहा कि मेरी स्व0 अवस्थी जी से जब भी मुलाकात हुई उनसे बहुत कुछ सीखने को मिला। श्री द्विवेदी ने इस मौके पर स्व अवस्थी जी लिखी कविता भी पढ़ी।वरिष्ठ कवि डॉ रामबहादुर मिश्र ने कहा कि उन्होंने विकास के क्षेत्र में इतने काम किये हैं कि वे हमेशा हमारे बीच में विद्यमान रहेंगे।माताबख़्स सिंह व यमुना प्रसाद तिवारी तथा सरवर सिद्दीकी ने अवस्थी जी से जुड़े संस्मरण सुनाए। इस मौके पर सिद्धार्थ अवस्थी सिद्धू भैया ने कहा कि मेरे पिता जी भले ही इस दुनिया में न हो लेकिन मैं उन्हें आस-पास ही महसूस करता हूं। उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि तब होगी जब हम सभी मिल करके उनके द्वारा दिखाये गये रास्ते पर चलें वह भी एकजुटता के साथ। स्वर्गीय सुरेंद्र नाथ अवस्थी जी के पोते विश्रुत अवस्थी ने कहा कि मुझे आप सभी का आर्शीवाद चाहिए जिससे मैं अपने बाबा जी के सपनों को साकार कर सकूं। सामाजिक कार्यकर्ता कृष्ण कुमार द्विवेदी राजू भैया ने कहा कि अवस्थी जी जैसे लोगो का केवल जन्म होता है उन जैसे महापुरुषों का मरण कभी हो ही नहीं सकता। दरअसल वे आज भी हम सभी के बीच वैचारिक रूप से जीवित हैं।उनकी सकारात्मक सोच की वजह से हैदरगढ़ का बहुत विकास हुआ।
इस मौके पर प्रमुख रूप से दिनेश शुक्ला, शिवकुमार चतुर्वेदी, राजेश सिंह, गंगा बक्श सिंह, शुऐब अहमद, दीपू द्विवेदी, यशकरन तिवारी, लल्ला खान,अतुल सिंह, रामआधार यादव, राजू सिंह, एसपी सिंह, गोपीकृष्ण अग्रवाल, अशोक सिंह, विष्णु पाण्डेय, अजय श्रीवास्तव, पंकज मिश्रा, आलोक तिवारी,लल्लू सिंह सहित सैकड़ों लोग उपस्थित थे। दिनेश शुक्ला, शिवकुमार चतुर्वेदी, राजेश सिंह, गंगा बक्श सिंह, शुऐब अहमद, यशकरन तिवारी, लल्ला खान,अतुल सिंह, रामआधार यादव, एसपी सिंह, गोपीकृष्ण अग्रवाल, नई मुजफ्फर खान उर्फ बकरी दी खान अशोक सिंह, विष्णु पाण्डेय, अजय श्रीवास्तव, पंकज मिश्रा, आलोक तिवारी,लल्लू सिंह सहित सैकड़ों लोग उपस्थित थे।
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