प्रकृति के खेल निराले होते हैं। कोई नहीं जानता उसके मन में क्या चल रहा है। उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले में रहने वाले एक परिवा...
प्रकृति के खेल निराले होते हैं। कोई नहीं जानता उसके मन में क्या चल रहा है। उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले में रहने वाले एक परिवार की 17 वर्षीय बेटी, जिसका नाम गुप्त रखा गया है, वो हमेशा से अपनी मां-बहनों की तरह ही साड़ियां पहनती रही, घर के कामों में हाथ बंटाती रही और सपने देखती रही। लेकिन जब 13-14 वर्ष की उम्र में उसके मासिक धर्म (पीरियड्स) शुरू न होने पर चिंता बढ़ी, तो प्रयागराज के श्री राम प्रसाद (एसआरएस) अस्पताल में जांच के दौरान जो सच्चाई सामने आई, उसने न केवल परिवार को, बल्कि चिकित्सकों को भी चौंका दिया।जांच में पता चला कि यह किशोरी बाहरी रूप से पूरी तरह स्त्रीलिंग (फीमेल) है,उसके चेहरे पर कोमलता, शरीर की बनावट सब कुछ लड़की जैसा। लेकिन आंतरिक जांच (अल्ट्रासाउंड और जेनेटिक टेस्ट) ने खुलासा किया कि उसके शरीर में पुरुषों के अंडकोष (टेस्टिकल्स) मौजूद हैं, गर्भाशय (यूटेरस) का कोई निशान नहीं है, और क्रोमोसोम की संरचना 46XY है,जो सामान्यतपुरुषों में पाई जाती है। लड़कियों में यह 46XX होती है। यह कोई साधारण चिकित्सकीय त्रुटि नहीं, बल्कि एक दुर्लभ आनुवंशिक विकार 'एंड्रोजन इनसेनसिटिविटी सिंड्रोम' (Androgen Insensitivity Syndrome - AIS) का मामला है, जहां शरीर पुरुष हार्मोन (एंड्रोजन) के प्रति असंवेदनशील हो जाता है, जिससे बाहरी विकास स्त्री जैसा हो जाता है। प्रकृति का खेल अनंत और अनोखा है। इस विशाल सृष्टि में हर पल कुछ नया, कुछ अनघट और कुछ आश्चर्यजनक घटित होता रहता है। प्रकृति की गोद में जन्म लेने वाले जीव-जंतु, पेड़-पौधे और सूक्ष्म जीवाणु, सभी अपने आप में एक अनूठी कहानी कहते हैं। ये जीव अपनी विविधता, अनुकूलन और रहस्यों से मानव मन को बार-बार चकित करते हैं। मिर्ज़ापुर की उस 17 वर्षीया किशोरी की कहानी, जिसके शरीर में लड़की होने के बावजूद पुरुषों जैसे अंग पाए गए, प्रकृति की इसी अनोखी रचना का एक उदाहरण है। यह घटना न केवल चिकित्सा विज्ञान के लिए एक आश्चर्य है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि प्रकृति के नियम और उसकी रचनाएँ कितनी जटिल और अप्रत्याशित हो सकती हैं।
- इंद्र यादव - स्वतंत्र लेखक,भदोही ( यूपी )
indrayadavrti@gmail.com
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