डॉ दिलीप कुमार झा वरिष्ठ पत्रकार झारखंड । दिनांक — 14/8/2026 पुलिस का स्मरण होते ही अगर नकारात्मक भाव आती है तो निश्चित रूप से...
डॉ दिलीप कुमार झा वरिष्ठ पत्रकार झारखंड ।
दिनांक — 14/8/2026
पुलिस का स्मरण होते ही अगर नकारात्मक भाव आती है तो निश्चित रूप से उनकी छवि या कर्तव्य और व्यवहार में कुछ कमी होती है । लेकिन जब किसी कुशल पुलिस कर्मी या अधिकारी से मिलते ही ये भाव बदल जाए कि ये हमारी समस्याओं को गंभीरता से सुनकर उसका अवश्य समाधान करेंगे तो वही सोच सकारात्मक भाव में बदल जाती है ।
हमारे यहां भी ऐसे योग्य और कुशल प्रशासनिक अधिकारी हैं ।पुलिस अधीक्षक गोड्डा मुकेश कुमार की सरलता सौम्यता और व्यवहार कुशलता एक उदाहरण है उनके अधीनस्थ अधिकारियों के लिए । वैसे बड़े बूढ़े कहते रहे हैं अगर जिंदगी में शांति चाहिए तो कोर्ट डॉक्टर और पुलिस की नजरों से बच कर रहो ।
मैं तो पत्रकार एक पत्रकार रहा हु और हमारी इज्जत और सम्मान एक पदाधिकारी कर सकते हैं लेकिन एक बॉडीगार्ड या होमगार्ड नहीं कर सकता ये जानते हुए भी कि ये कोई अपराधी नहीं या दलाल नहीं या प्रतिदिन थाना का चक्कर लगाने वाला नहीं । पत्रकार होने के नाते मेरी भी कुछ जरूरतें होती हैं किसी मुद्दे की जानकारी लेने या उनके मोबाइल नंबर की जरूरत होती है जिससे किसी आपात स्थितियों में उनसे संपर्क स्थापित किया जा सके । लेकिन एक बॉडीगार्ड को सिर्फ ये दिमाग में आए कि किसी की पैरवी करने ही आए हैं हमारे द्वारा अगर ये साहब से मिलेंगे तो मुझे भी कुछ फायदा मिल जाएगा और अगर वो व्यक्ति सीधा पदाधिकारी के संपर्क चला जाता है तो मेरी कमाई खत्म हो जायेगी ।तो वो बॉडीगार्ड या आदेश पाल जाकर उनकी आलोचना अपने पदाधिकारी के पास करेगा जिससे मिलने वाले व्यक्ति के प्रति एक नकारात्मक भाव बगैर कोई गलती किए उत्पन्न कराने में सक्षम हो जाता है ।
ये सिस्टम में शामिल लोग होते हैं जो पुलिस की छवि खराब करते हैं अपनी अहमियत बढ़ाने के लिए ।
ऐसे छोटे तबके के लोगों के लिए अधिकारी की नजर रहनी चाहिए । जो पुलिस की छवि को खराब करते हैं कानाफूसी करके अपने नाजायज स्वार्थ के लिए ।
गोड्डा जिले में जितने पदाधिकारी हैं अपने कप्तान से सीखने की आवश्यकता है ।अपने डीएसपी मुख्यालय जे पी एन चौधरी से सीखने की आवश्यकता है । गोड्डा थाना प्रभारी रहे पुलिस निरीक्षक दिनेश महली से सीखने और समझने की आवश्यकता है ।सबसे मिलना उनकी समस्याओं को सुनना ओर उसपर कार्रवाई करना जिससे उनकी लोक प्रियता में काफी इजाफा हुआ । बहुत अधिक व्यस्तता के बावजूद भी थाने में आए शिकायत करता से मिलकर उनकी समस्याओं का समाधान करना दूसरे पदाधिकारियों के लिए एक उदाहरण है ।कुछ लोग आलोचना करने वाले भी होते हैं लेकिन ये लोग अवसर वादी होते हैं ये गिने चुने लोग होते हैं जबकि आम नागरिक उनकी प्रशंसा ही करते पाए गए है।
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