इंद्र यादव/मुंबई/महाराष्ट्र FDA का धमाकेदार खुलासा: अस्पतालों में मरीजों की जेब खाली करने का खुला खेल! भाई साहब, अब तो हद हो गई!...
इंद्र यादव/मुंबई/महाराष्ट्र FDA का धमाकेदार खुलासा: अस्पतालों में मरीजों की जेब खाली करने का खुला खेल! भाई साहब, अब तो हद हो गई! महाराष्ट्र के FDA आयुक्त तुकाराम मुंढे ने एक ऐसा सर्वे किया है कि सुनकर आम आदमी का खून खौल जाए।
सोचो… अस्पताल में पड़े मरीज को एक साधारण सलाइन की नली (IV सेट) लगानी पड़ती है। अस्पताल को यह नली महज 11 रुपये में मिलती है। लेकिन बिल में मरीज से 325 रुपये वसूल लिए जाते हैं!
यानी 2,841 प्रतिशत का मुनाफा।
एक सिरिंज 6-7 रुपये में खरीदते हैं और मरीज से 57 रुपये लेते हैं।
कैथेटर 29 रुपये का लेकर 310 रुपये का बिल ठोक देते हैं।
नेब्युलाइजर मास्क 40-45 रुपये का लेकर 650-700 रुपये तक चार्ज कर देते हैं।
ये कोई गलती नहीं है। ये जानबूझकर चल रहा सिस्टम है।
मरीज को पता ही नहीं चलता कि लूटा जा रहा है
तुकाराम मुंढे ने बहुत सही कहा है – अस्पताल के बिल का सबसे महंगा हिस्सा शायद अस्पताल तक पहुंचता ही नहीं। मरीज बेहोश या कमजोर पड़ा होता है। उसे कैसे पता चले कि उसके शरीर में जो सामान लग रहा है, उसकी असली कीमत कितनी है और कितना मुनाफा जोड़ दिया गया है।
सच तो यह है कि मरीज अस्पताल में भर्ती होने के बाद मजबूर हो जाता है। डॉक्टर-नर्स जो सामान इस्तेमाल करते हैं, वही लेना पड़ता है। न कीमत पूछ सकते हो, न तुलना कर सकते हो, न मना कर सकते हो।
बस चुपचाप बिल भरना पड़ता है।
कहां जाता है इतना पैसा! अस्पताल सस्ता सामान खरीदता है, लेकिन MRP बहुत ऊंचा लिखवा लिया जाता है। फिर उसी ऊंचे MRP पर मरीज से पैसे वसूल लिए जाते हैं।
कंपनी का मुनाफा, डिस्ट्रीब्यूटर का मुनाफा, अस्पताल का मुनाफा… सब मिलकर मरीज की जेब खाली कर देते हैं।
और मजे की बात यह है कि ज्यादातर मेडिकल सामान अभी भी दवाओं की तरह सख्त प्राइस कंट्रोल में नहीं आते। इसलिए यह लूट खुलेआम चल रही है।
आम आदमी का क्या हाल होता है!
एक गरीब या मध्यम वर्ग का परिवार अस्पताल पहुंचा। पहले से ही इलाज का खर्चा भारी पड़ता है। ऊपर से छोटे-छोटे सामानों पर इतना मुनाफा… तो बिल आसमान छूने लगता है।
कई परिवार कर्ज लेकर इलाज करवाते हैं। कई बार इलाज अधूरा छोड़ना पड़ता है।
ये सिर्फ महाराष्ट्र की नहीं, पूरे देश की कहानी है।
अब क्या होना चाहिए! तुकाराम मुंढे ने केंद्र सरकार और NPPA को पत्र लिखकर कहा है कि इन जरूरी मेडिकल सामानों पर भी सख्त नियंत्रण लगाओ। ट्रेड मार्जिन सीमित करो।
लेकिन सिर्फ पत्र लिखने से काम नहीं चलेगा।
सरकार को तुरंत इन सामानों को प्राइस कंट्रोल में लाना चाहिए।
हर अस्पताल को मरीज के बिल में असली खरीद कीमत भी दिखानी चाहिए।
जनता को भी जागरूक होना पड़ेगा। बिल मिलते ही सवाल पूछो – भाई, यह IV सेट 11 रुपये का है या 325 का!
आज हम चुप रह गए तो कल हमारे घर में भी यही लूट होगी।
अस्पताल मुनाफे का कारोबार नहीं है। यह इंसानियत का काम है। लेकिन जब मुनाफाखोरी इतनी हद पार कर जाए, तो फिर चुप रहना भी अपराध हो जाता है।
जागो! सवाल पूछो! लूट रोकने के लिए आवाज उठाओ!
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