जीवन के संघर्षों से कभी हार नहीं मानी हेमानी मिश्र ने (उर्फ बड़ा बाबू ) ने । डॉ ० दिलीप कुमार झा ,पत्रकार ,गोड्डा ,झारखंड दिना...
डॉ ० दिलीप कुमार झा ,पत्रकार ,गोड्डा ,झारखंड
दिनांक —13/2/2026
गोड्डा । कमलपुर में एक से एक बढ़कर लोग हुए लेकिन जिस संघर्ष की कहानी मैं लिखने जा रहा हूं वो आजकल के कई युवाओं को उद्वेलित कर संघर्ष पूर्ण जीवन अपनाने का संदेश देती है । कल हेमकांत मिश्र की आकस्मिक निधन की सूचना मिलीं कि वो स्वर्गलोक सिधार गए हैं । बचपन से उन्हें देखता आया था बड़े ही सरल हृदय और स्वभाव के आदमी थे दुबली पतली काया सिर्फ हड्डियों का ढांचा जवानी के दिनों में पायजामा और कमीज उनकी पोशाक होती थी जो बाद में चलकर धोती और शर्ट हो गई । उन्हें एक ही आदत थी तंबाकू खाने की और सुपाड़ी चबाने की बोलते बोलते कभी कंधे को झटका देते थे हमेशा जल्दबाजी में दिखाई देते थे शायद ही गांव और इलाके का आदमी होगा बड़े से लेकर छोटा तक जो उनसे तंबाकू मांग कर नहीं खाया होगा या बना कर भी बड़े प्रेम से खिला देते थे । पैतृक संपत्ति के नाम पर एक टूटा फूटा घर के अलावे और कुछ उनके पास नहीं था । एक छोटा भाई जिसे मीट्रिक पास कराकर प्राइवेट कंपनी में काम पर लगाया उस भाई से भी कोई खास सहायता नहीं मिली ।उन्होंने अपने परिवार के भरण पोषण के लिए क्या नहीं किया कभी चूहा मारने उड़ीस मारने की दवा बेची कभी बैंक में पानी पाड़े का कार्य किया सबका सुनना उनका स्वभाव था किसी से कोई लड़ाई झगड़ा नहीं अपनी ड्यूटी अपना घर सुबह कुछ समय मिलने पर एक दो घरों में पूजा पाठ कर कुछ आमदनी में इजाफा कर लेना । परिवार में एक विधवा भाभी एक भतीजी दो लड़के एक दिव्यांग पत्नी जो दोनों पैरों से लाचार थी । इतने प्राणियों के भोजन की व्यवस्था और उस अकेले आदमी का जीवन यापन के लिए संघर्ष । हाट हाट घूमकर दवा बेचना कुछ 10किलो मीटर 20किलोमीटर पैदल जाना और उधर से घर के जरूरत का सामान लेकर आना । यही जिंदगी थी समय ने करवट ली एक लड़का सरकारी स्कूल में मास्टर के पद पर बहाल हुआ दूसरा भी निजी स्कूल में बहाल होकर घर का खर्च उठाने लगे । बड़े बाबू ने शारीरिक कमजोरी की वजह से नौकरी छोड़ा और 3/4साल बाद इस दुनिया को गुड बाई कहा । ये आज के युवाओं के लिए एक संदेश है जो अपने परिवार की जिम्मेदारी मिली वे उसका निर्वाह करते जाओ ।न किसी से कभी उनकी कोई लड़ाई हुई न बहस अपनी जिंदगी में हमेशा अपने कार्य में व्यस्त रहे । उस जमाने में उन्होंने मीट्रिक तक पढ़ाई की थी । उनकी अंग्रेजी की लिखावट अच्छे अच्छे को आईना दिखाती थी 88वर्ष की उम्र में उन्होंने दुनिया को अलविदा कहा । पूरे परिवार ने अंतिम समय में उनकी खूब सेवा की लेकिन एक माह वो अपने बिस्तर पर पड़े रहे और सम्हाल नहीं पाए ।
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