डॉ ० दिलीप कुमार झा पत्रकार न्यूज प्रभारी झारखंड । दिनांक 27/5/2026 देश में चल रहे हालात और ज्वलंत घटनाओं पर अगर हम एक नजर डाले...
डॉ ० दिलीप कुमार झा पत्रकार न्यूज प्रभारी झारखंड ।
दिनांक 27/5/2026
देश में चल रहे हालात और ज्वलंत घटनाओं पर अगर हम एक नजर डालें चाहे वो टीवी चैनल हों या दैनिक समाचार पत्र या सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म द्वारा चलाई जा रही समाचार में सबसे ज्यादा आत्महत्या या मौत की खबरें आ रही है । हर दिन एक नया कांड एक नई बहस एक नया प्रकरण सामने आ रहे हैं एक दौर चला जब पुरुष विवश होकर आत्महत्या कर लेते थे जिनमें पढ़े लिखे समझदार लोग भी होते थे और आम लोगों की खबरें आती थी या गुमशुदा होकर भी इस दुनिया को छोड़कर चले जाते रहे इनकी संख्या हजारों में नहीं लाखों में हैं जो पत्नी प्रताड़ित थे कानूनी विषमताएं थी एक तरफा आरोप और फैसले होने के भय से जेल यातना से बचने के भय से या बुढ़ापे में माता पिता बहन भाई के जेल जाने के भय से दहेज प्रताड़ना का आरोप लगने से कानून एक तरफा न्याय करती थी सिर्फ आरोप लगा देने से ही बगैर सुनवाई के उन्हें पुलिस पकड़ कर जेल भेज देती थी फिर जमानत और पैरवी ये किसी नार कीय यातना से कम नहीं था । गरीब हो या अमीर अपने समाज में सम्मान के साथ सभी जीना चाहते हैं लेकिन एक नई लड़की के परिवार में आ जाने से रिश्ते तार तार होने लगे और सजा सिर्फ लड़के वालों को मिलने लगी । महिला आयोग का गठन हुआ ,मानवाधिकार आयोग का गठन हुआ ,समाज एवं कल्याण मंत्रालय का गठन हुआ लेकिन फिर भी न्याय अधूरी रही । पुरुष और स्त्री के संबंधों में आई कटुता का मूल्य पूरे परिवार को धन इज्जत मान मर्यादा सम्मान देकर भी नहीं चुकाया जा सकता था और विकल्प था पति के परिवार को जेल और उस पति को भी जेल जिसने पंडित के सामने अग्नि के सामने सात फेरे लगाते हुए पत्नी की रक्षा का संकल्प लेकर जिंदगी भर साथ निभाने की कसमें खाई थी खुशियों का खजाना मिल गया होता था लेकिन कुछ ही दिनों में संसार उजड़कर रह जाता था । जब इस तरह से आत्महत्याएं होने लगी तो कानून मे कुछ संशोधन तो हुए लेकिन समस्या का समाधान नहीं निकल पाया । दहेज हत्याओं के आरोप से खुद न्यायाधीश भी नहीं बच पा रहे दृष्टांत है द्विशां शर्मा का आत्महत्या या हत्या जांच अभी चल रही है तबतक कई केस और पर्दे पर आ गए अनु शर्मा ,और मीना की केस इन कांडों की बाढ़ सी आ गई है । आज एक केस पुलिस सीबीआई जांच में लगती है एक घंटे में ही दूसरे केस की इंट्री हो जाती है ।
आखिर इसकी न के नीचे दबे रह जाते हैं जिसमें समाज के सामने इज्जत जाने का भय या लड़कियों में बढ़ती आधुनिकता और उन्मुक्तता पश्चिमी सभ्यता का बढ़ता प्रभाव बेमेल संस्कारों के बीच विवाह होना अंतर्जातीय विवाह की बढ़ती प्रचलन ,लड़का या लड़की अपनी पसंद की शादी कर लेना । भारत देश के नागरिकों की सोच आज भी हमारी सनातन सभ्यता संस्कृति और परंपराओं में विश्वास ही नहीं कहीं न कहीं उसके दिल दिमाग और अवधारणाओं में बसी होती है लेकिन जिसने जिन परिवारों ने अपने स्तनों को सनातन सभ्यता नहीं सिखाई संस्कार नहीं दिए उनके लिए सिर्फ टीवी पर चल रहे आधुनिक रिश्ते ही उनकी जीवन शैली बन जाती है ।इंग्लैंड ,अमेरिका ,फ्रांस ,जर्मनी कनाडा में उन्मुक्त जीवन शैली को अपना चुके हैं जिसमें मां बाप भाई बहन दादा दादी सिर्फ एक रिश्ते बन कर रह जाते हैं एक घर में इतने परिवार रह नहीं सकते । बेटे अलग ,मा अलग ,बाप अलग भाई अलग बहन अलग ये पश्चिमी सभ्यता का मूल आधार है । कभी सात दिनों में कभी एक माह में मिलेंगे खाना साथ खाएंगे फिर अपनी पत्नी के साथ छोटे बच्चे के साथ अपने अपने आशियाने में जाकर सिमट जाएंगे । मां बाप बूढ़े हो गए उन्हें किसी वृद्धाश्रम में मरने के लिए छोड़ जाएंगे कभी कभी उनसे मिलने भी चले जाएंगे वो मर जायेंगे एक ही दिन में उनकी अंत्येष्टि कर हवन कर सारे रिश्ते मानवीय संवेदनाओं को रिश्तों के तार को स्वाहा करके अपने अपने घरों में वापस आ जायेंगे ।बेटा बालिग हुआ वो मां बाप से दूर जाकर घर बनाकर अपनी रोजी रोटी कमाने में मशगूल हो जाते हैं ये है हमारी पश्चिमी सभ्यता जिसकी नकल हम आज अपने हिंदुस्तान में करने जा रहे हैं जिसमें हम संबंध रिश्ते हमारी अपनी पुरातन व्यवस्था को भी नष्ट करते जा रहे हैं । हम कैसे परिवार की कल्पना कर रहे हैं हम कैसी व्यवस्था को अपना रहे हैं । अब यहां भी वही होने लगा मां बाप की लाश सड़ने लगती है घरों में बेटा और उसका परिवार विदेशों में । वो आते हैं तो सिर्फ संपत्ति के लोभ में रिश्ते की आंच में उनका दिल नहीं पिघलता ।
आज हर युवा दंपत्तियों की लगभग यही सोच है जिसे हमने कुछ टीवी पर देखा कुछ लोगों से सुना और कुछ सोशल साइट्स पर देखा कुछ भाग्यशाली और पैसे वाले विदेशों में घूमने भी जाते है कुछ के दोस्त और रिश्तेदार भी विदेशी कहानियां सुना कर उन्हें मायाजाल में फसाते हैं लेकिन एक बात मैं अपने अनुभव से कहना चाहूंगा जो यह है हमारे देश में है वो कहीं नहीं है ये मेरा मूल मंत्र है । मैने भी 4 देशों की यात्राएं ही नहीं वहां रहकर कार्य करने का अनुभव मिला है । मेरा एक भाई आज इंग्लैंड में जाकर ही बस गया है मुझे इसका पूरा अनुभव है ।
यहां के लड़के और लड़कियां अपने सम स्तर के लोगों के साथ संबंध बनाएं और पारिवारिक सामाजिक व्यवस्था में अपने आपको ढालना सीखें ,। घर के बुजुर्गों की सलाह लेकर ही संबंध बनाएं हवा हवाई के सपने देखने बंद करें । अपने आप को सोशल साइट्स पर दिखाकर अपना भविष्य बर्बाद मत करें सनातन सभ्यता संस्कृति ,संस्कार को जीने का आधार बनाएं जीवन परिवार समाज देश भी सुरक्षित रहेगा ।
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