डा ० दिलीप कुमार झा पत्रकार, झारखंड । दिनांक21 /10/2026 देश के युवाओं में फ़ैल रही जैन जी टेन जी मैन जी अपने ही देश की मूल सभ्य...
डा ० दिलीप कुमार झा पत्रकार, झारखंड ।
दिनांक21 /10/2026
देश के युवाओं में फ़ैल रही जैन जी टेन जी मैन जी अपने ही देश की मूल सभ्यता और संस्कृति पर कुठाराघात है । वर्तमान स्थिति को देखकर तो ऐसा ही लगता है क्या ऊंच क्या नीच क्या भूत और क्या बैताल सभी के गुरु वही शमशान वाले औघड़ ही हैं जो एक हाथ में मदिरा की बोतल दूसरे हाथ में मांस का टुकड़ा जिसे रान कहते हैं वो रान मनुष्यों से लेकर पशु पक्षी किसी का भी हो सकता है ,हम वहीं खड़े होने की कोशिश में हैं । बूढ़े बच्चे यहां तक कि हमारे प्रधान मंत्री ,गृह मंत्री भी उसकी चोंच में चोंच मिलाकर कह रहे हैं हम भी तुम्हारे साथ हैं । इन रंग बदलते गिरगिटों से सावधान रहने की जरूरत है । लोगों में व्याप्तहताशा ,निराशा ,मानसिक विक्षिप्तता, हिंसा हत्या और आत्महत्या की प्रवृत्ति ,हत्या की प्रवृत्ति अब तेजी से बढ़ रही हैं । प्रतिदिन ये हम समाचारों में पढ़ रहे हैं इन समाचारों की बाढ़ सी आ गई है । क्या साधु क्या सन्यासी , क्या महिलाएं ,और क्षात्र,क्षात्राएं इस जैन जी से ,प्रेम प्रसंग के जाल और ,बेरोजगारी के दल दल में फसते जा रहे हैं ,आर्थिक परेशानी , पति पत्नि का विवाद ,कानून के भय का जबरदस्त मानसिक तनाव बुजुर्गों को अपने संतानों की उपेक्षा का भय ,जीवन के संघर्षपूर्ण रास्ते में ये ठहराव किसी भी वक्त रुकने ठहराने और निर्णय लेने का वक्त सामने खड़ा हो जाता है खुद से हार जाने के बाद जिंदगी को ही समर्पित कर इन कृत्रिम जंजालों से दूर होना चाहते हैं । श्रद्धा कपूर कितना प्यारा नाम रखा था मां बाप ने ,मुस्कान ,और भी बहुतेरे नाम हैं ।इच्छाएं अनंत होती हैं हर इंसानों के मन में होता है अपनी सारी ताकत धन बुद्धि लगा कर सफल हो जायेंगे ।लेकिन इसके बावजूद भी असफल हुए लोग अंतिम निर्णय आत्महत्या का ही ले लेते है ।कोई युवक 43 मंजिल से कूद कर आत्महत्या कर लेता है ,कोई साधु सन्यासी 4 मंजिलों से छलांग लगा कर । सीसीटीवी कैमरे की सच्चाई से ये बात सामने निकल कर आई कि इन्हे किसी ने धक्का नही दिया किसी ने फेंका नही , फिल्म अभिनेत्री दिशा साल्यान का केस सुशांत सिंह राजपूत का केस आजतक उलझा हुआ है ,गले में फंदे डालकर हत्या की या आत्म हत्या इसका भी रहस्य कायम है ,कोई मरने की जगह तलाश रहा है कोई साधन ,लेकिन इस बड़ी समस्या को सरकार ने अपराध की श्रेणी में रखा है लेकिन उसे फुरसत नहीं आखिर क्यों ऐसा हो रहा है देश में युवाओं के साथ ।आपको चैन से मरने भी नही दूंगा और जिंदा भी नही रहने दूंगा ,कानून तो अंग्रेजों ने बनाए हैं उस समय पाकिस्तान बांग्लादेश लेकर हमारे देश की जनसंख्या 40 करोड़ थी जबकि आज ये 140 करोड़ हो चुकी है ।
क्या उस समय की परिस्थितियों से आज 2026 की तुलना की जा सकती है?कभी नहीं । लेकिन इन समस्याओं पर अवलोकन करने की किसी को न समय है न बदलाव की कोई चिंता ।जनता कर नही सकती ,न्याय पालिका ,कार्यपालिका विधायिका तीनो अपनी अपनी जगह सुरक्षित रखने में व्यस्त हैं पेट भरने में दिक्कत नही अलगी आमदनी मेवकोई रुकावट नही ।चुनाव सत्तापक्ष ,विपक्ष सारा लोकतंत्र यहीं पर आकर सिमट चुकी है और मीडिया इन्ही को हवा देकर आग लगाने का पारिश्रमिक पाती है अलग हट कर इनका न कोई विषय है न कोई भविष्य की योजनाएं।
राजनीतिक पार्टियों को सत्ता के लिए लड़ने से फुर्सत नहीं , जिन्हें जनता के विकास से जुड़े विकाश कार्य के लिये कार्य करना था उन्हें अपने विरोधियों से लड़ने से ही फुर्सत नहीं , विपक्ष ने भी सत्ता में रहकर वहीं किया जो आज बीजेपी कर रही है ।फिर जनता की समस्याओ को दूर करने कौन आयेगा ये सबसे बड़ा सवाल है ?
इन राजनीतिक स्वार्थी नेताओं ने आधी अधूरी मिली आजादी को अच्छी तरह से जांचने परखने का भी कार्य किया नहीं और सत्ता प्राप्ति के लिए आपस में लड़ना झगड़ना प्रारंभ कर दिया। भ्रष्टाचार, घोटाले, अपने लिए धन संग्रह ,अगली बार के चुनावों के लिए मार्ग प्रशस्त करने की समस्याओ को दूर करने में लगे रहे जो आज तक कायम है । गंभीरता से उन्हें वक्त ही नहीं मिला जो देश की जन समस्याओ पर चिन्तन मनन कर सके जो लोकतंत्र की सबसे बड़ी त्रासदी है । जनता इनके द्वारा फेंके गए कुछ टुकड़े पर नजरें गड़ाए बैठी है । लेकिन आगे बढ़कर इस लोकतंत्र से अपना पीछा छुड़ा नहीं पा रही है ।100 साल बीत जाएंगे इस लोकतंत्र के लेकिन जनता का कोई भला नहीं होगा , इसमें दोष न नेताओं का है ना जनता का है दोष है इस व्यवस्था का , विभिन्न धर्मों और जातियों में विभिन्न क्षेत्रों में विभिन्न भाषाओं में बंटे देश के नागरिकों को कभी एकमत नहीं होने दे सकता है जिसका लाभ हमेशा राजनीतिज्ञ उठाते रहेंगे और जनता हमेशा ठगी जाती रही है और आगे भी ठगी जाती रहेंगी । ऊपर से धर्म निरपेक्षता का लबादा ओढाकर बाकी बची खुची कसर भी पूरी कर दी गई है।
लोकतंत्र की उपलब्धता देखें ,ईभईएम हटाओ ,बैलेट लाओ ,चुनाव आयुक्त हटाओ,, त्याग पत्र दो ,वोट चोरी ,SIR लगाओ कोई कहता इसे हटाओ इसमें जनता का क्या कसूर है जिसका हक और सुविधा मारा जा रहा है ? न नेताओं की तखवाह और पेंशन बंद हुई है न अधिकारियों और कर्मचारियों की ,बंद हुई है तो जनता की जुबान ।पत्रकार चंद सिक्के में ही बिक रहे हैं रुपए की जरूरत ही नही ,न्यायाधीश अपनी कुर्सी बचाने में परेशान है ,अधिकारी नेताओं के चंगुल में फसे हैं जो सिस्टम में शामिल होकर अपनी तनख्वाह और सुविधा के साथ अपने % का मजा ले रहे हैं नया कुछ करना नही ,सिर्फ मीटिंग और आंकड़े तैयार रखने होते हैं ।
अब आप ही बताएं हम कब तक बीजेपी या कांग्रेस इन दोनो पार्टियों को अवसर प्रदान करते रहें ? अन्य सभी पार्टियां अपने राज्य तक ही सीमित हैं ,क्या हमारे देश की जनता के पास तीसरा कोई विकल्प है ?आज न हैं अपनी विरासत में मिली सभ्यता ,संस्कृति और परम्पराओं को बचा पाने में सक्षम हो रहे हैं न कोई आधुनिक ठोस नीतियों को बना पा रहे हैं । नेता सिर्फ सत्ता देखते हैं चुनाव में जीत या हार देखते हैं । धार्मिक संगठन भी आपस में तू कुत्ता मैं गधा की लड़ाई लड़ रहे हैं जिन्हे सद्मार्ग के रास्ते पर चलाना चाहिए था पूरे देश को आज वो खुद ही कुमार्ग के रास्ते पर चल रहे हैं । प्रतिभाएं कुंठित होकर दम तोड रही हैं नलायकों की फोज बंदरों के अधीन रहकर कार्य कर रही हैं । देश की एकता और अखंडता की रक्षा करने में सिर्फ नारों और वादों से नही कर्म को आधार बना कर करने की आवश्यकता है । जातियों और धर्मो में नफरत फैला कर हम हिंदुस्तान को सशक्त और समृद्धशाली देश नही बना सकते । सनातन सभ्यता और संस्कृति की रक्षा के लिए लोभ और मोह नहीं सर्वशक्तिशाली संगठन की जरूरत है जिसमे सारे भारतवासियों को एक झंडे तले आना होगा । एक संविधान एक विधान तभी होगा मेरा ,भारत महान ।
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