झारखंड का सबसे नायाब क्षेत्र संथाल परगना प्रमंडल ।

डॉ o दिलीप कुमार झा पत्रकार झारखंड । दिनांक —28/3/2026 गोड्डा — झारखंड का  सबसे अनूठा और सबसे अलग प्रमंडल है संथाल परगना । इसमें...

डॉ o दिलीप कुमार झा पत्रकार झारखंड ।

दिनांक —28/3/2026

गोड्डा — झारखंड का  सबसे अनूठा और सबसे अलग प्रमंडल है संथाल परगना । इसमें गोड्डा,देवघर ,जामताड़ा ,पाकुड़ ,साहिब गंज,   दुमका  जैसे जिले शामिल हैं ।जिले   के निवासी बड़े खुशनसीब हैं  और खुद्दार लोग हैं जिसमें संथाल आदिवासी पहाड़िया के साथ दिकू  की संख्या भी कम नहीं हैं  और अल्पसंख्यकों के लिए ये क्षेत्र   सरकारी गैर मंजूरआ जैसी है आदिवासी महिलाओं के  साथ शादी करना संबंध बनाना और धीरे धीरे अपने धर्म के  नेताओं के साथ संपर्क बढ़ाकर आवश्यक कागजात बनाकर स्थाई नागरिकता प्राप्त करने का एक फार्मूला तैयार है और वो इस जगह आकर नागरिक बन जाते हैं । झारखंड की राज्य सरकार मजबूर है सत्ता के लिए  अल्पसंख्यकों को साथ  लेकर चलने के लिए चाहे वो कांग्रेसी हो या अन्य किसी पार्टी में  । और भाजपा का मुख्य मुद्दा इस क्षेत्र में  विकास और डेमोग्राफी का  बदलना ही है । कई क्षेत्रों में इनकी संख्या ज्यादा हो चुकी है  । इस प्रकृति के खास  क्षेत्र में धरती पर पैदा होते हैं कुछ आकर इसी  अनमोल धरती के टुकड़े पर बस जाते  हैं और यहीं से उनके  उत्थान का रास्ता मिलता है  वो सबकुछ पाते हैं जहां उनके पैतृक स्थान में कभी प्राप्त नहीं हो सकता था  उन्हें यहां आसानी से मिल जाता है ।धन संपदा पद ख्याति और चेले (सहायक या चेले ) और एक दिन वे इतने समृद्ध और शक्तिशाली हो जाते हैं ख्याति प्राप्त कर जन प्रतिनिधि भी बन जाते हैं और दबा कर लूटते हैं राजकोष को खनिज संपदा को ,वन संपदा को ,और वो एक दिन धनपशु बन जाते हैं ।राजनीतिक शक्ति जाति धर्म और संप्रदाय के नाम पर उन्हें मिल जाती है । ।पुरखों की छोड़िए मूर्खों की जाति इतनी अधिक है कि कई मूर्ख उम्मीदवार बगैर किसी योग्यता के विपक्ष के शिक्षित पढ़े लिखे उम्मीदवार की जमानत जब्त करा देते हैं ।पढ़े लिखे या शिक्षित का । म तलब डिग्री लेना है ज्ञान नहीं ,किसी की दादागिरी चली स्थानीय  स्कूल और कॉलेज में किसी की बाप चाचे की और कोई खुद बाहुबली और किसी की  आपराधिक चरित्र में ख्याति प्राप्त थी । उन्हें नौकरी तो जिंदगी में मिलनी नहीं थी वो नेता बन गए ।ये एक ऐसा पद होता है जिसमें जितनी बुरी चरित्र और बुरा आदमी होगा उद्दंड होगा बदतमीज होगा वो उतनी जल्दी तरक्की करता है ।
उसमें एक जिला गोड्डा भी महत्वपूर्ण जिला है ।आदिवासियों और संतालों को उनके जाति के ही नेताओं ने सबसे ज्यादा लूटा , अल्पसंख्यक समाज ने भी इस प्रमंडल को सर्वाधिक प्रमुखता दी है और उप शासक के रूप में यहां कई अल्पसंख्यक नेता बने जो शाम दाम दंड भेद की नीति अपना कर राज्य सरकार की तो कोई बात ही नहीं केंद्र सरकार को भी ठेंगा दिखा देती है ।बंगला देशियों का घुस पैठ सबसे ज्यादा संथाल परगना में ही है । ये भी  बात सही है कि कई जिलों अनुमंडल और प्रखंड में मतदाताओं की डेमोग्राफी बदल गई हैं । इस मामले में गोड्डा सांसद डॉ ० निशिकांत दुबे की चिंता स्वाभाविक है क्योंकि उनके  क्षेत्र में भी घुसपैठ बराबर जारी है । संसद से लेकर सड़क तक जनता से लेकर बुद्धिजीवी वर्ग को भी उन्होंने इस बदलते डेमोग्राफी से कई बार  अवगत कराया है । लेकिन राज्य सरकार का अंतर्मन से सपोर्ट नहीं मिलने से और भाजपा ,झामुमो के टकराव की वजह से इस समस्या के समाधान पर कोई बात नहीं बनती है । सांसद के अथक प्रयास से कई विकास हुए जिसमें रेल लाइन का जाल ,एम्स ,हवाई जहाज अड्डा ,सड़कें अदानी द्वारा उद्योग ,और भी कई परियोजनाओं की रूप रेखा तैयार की जा रही है । लेकिन छोटी छोटी सुविधा आन जनता के लिए  स्थानीय  राज्यस्तरीय  और यहां के जनप्रतिनिधि नेताओं की प्राथमिकता नहीं होती विकास या   सुविधाओं की । राज्य सरकार अनाप  शनाप योजनाओं में अंधाधुंध रुपए लुटा रही है जहां मोटे कमीशन खोरी की उम्मीद बंधी होती है गांव में पंचायत में जिन योजनाओं के नाम पर करोड़ों रुपए खर्च किए जा रहे हैं जनता के लाभ के नाम पर वस्तुत: वो योजनाओं के नाम पर रुपए की बंदरबांट हैं ।जो योजनाएं पहले से चल रही है उनके रख रखाव के लिए बहुत कम पैसे में ही लोगों को सुविधा मिल जाएंगी लेकिन नई परियोजनाओं में लागत ज्यादा लगेगी  और कमीशन भी मोटा मिलेगा ।चमचे बेलचे भी वैतरणी नदी पार कर  जाएंगे । गोड्डा शहर की गलियों को देखें जीर्ण शीर्ण अवस्था है उनकी पानी का जमाव गलियों में पानी जमाव की समस्या से पूरे शहर के नागरिक पीड़ित हैं । स्ट्रीट लाइटें लगी हैं लेकिन जलती नहीं है मेंटेनेंस  का आभाव । सड़कों पर सब्जी बाजार ठेले फल वाले अतिक्रमण कर सड़क जाम करते  रहते है ।  मवेशियों का अड्डा बना रहता है मुख्य सड़क जिसमें कारण कई दुर्घटनाएं हो जाती हैं । मोटर साइकिल की चेकिंग सिर्फ दिखावे के लिए होती है हल्की हल्की किसी को फाइन देना पड़ता है तो देकर निकल जाते हैं बिना नंबर प्लेट की गाड़ियां फर्राटे भरती हुई निकल जाती हैं , इन सभी छोटी छोटी चीजों का संबंध आम नागरिकों के साथ जुड़ी हुई हैं । लेकिन  अब 29/30 मार्च 2026 में चतुर्थ राजकीय गणतंत्र मेला महोत्सव  मनाया जाएगा ,देखिए जनवरी माह में ही गांधी मैदान में गणतंत्र समारोह मनाया गया जिसमें मंत्री दीपिका पांडे बतौर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित हुई थी और  सभा को संबोधित भी किया था। । गोड्डा मेले की डाक एक करोड़ एक लाख में हुई थी लेकिन दुकान सर्कस थियेटर आदि जो भी एक बड़े मेले में लगते हैं सब आए और 26जनवरी से 5 मार्च 2026 तक रहे तारीख उसमें पैसे भी उगाही हुए । अब राज्य सरकार इसे अलग से मनाने जा रही है ।इसका फायदा जनता को क्या मिलना है पता नहीं सिवाय प्रदर्शन और राज्य सरकार की उपलब्धि जो जमीन पर नहीं सिर्फ कागजों ,फोटो मीडिया के कैमरे तक ही सीमित रहते हैं । प्रचार प्रसार लाखों करोड़ों के होते हैं लेकिन एक आम मतदाता को विशेष रूप से पूछिए यो जनाओं का सत्य क्या है पता मिल जाएगा । मानता हु पत्रकार  भी  भी बिक जाते हैं सोशल मीडिया की तो बात ही छोड़िए वो खुद किसी प्रतिनिधि के प्रचारक बन कर कुछ भविष्य में मदद लेते हैं ।
निचले स्तर का भ्रष्ट्राचार एक शीर्ष अधिकारी से लेकर चपरासी और दलाल नेता कार्यकर्ता सब कोई मिले  होते हैं ।हर जिले में निगरानी विभाग और ईडी की शाखा खुलनी चाहिए ।सड़कों पर सैकड़ों मवेशियों की झुंड  बैठी रहती है गोड्डा की मुख्य सड़कों पर कई बार दुर्घटना ग्रस्त लोग हो जाते हैं लेकिन इसके लिए अड़गड़ा। नहीं न कोई देखने वाला ।गोड्डा की मुख्य सड़कों को ही देखिए कहीं प्लेन  नहीं मिलेंगी खुरचे हुए सड़क उधरी हुई सड़कें मिलेंगी जबकि उस पर कार से साहब साहिबा नेता और अभिनेता सभी गुजरते हैं लेकिन किसी का ध्यान उन सड़कों पर नहीं होता ।जबकि  फालतू कामों में करोड़ों रूपये खर्च  हुए जिससे जनता को कुछ नहीं मिलना इससे अच्छा कई मूत्रालय सड़कों के किनारे  लगे होते तो अच्छा था ।पीने का पानी जितने खुलते हैं  वो बंद हो जातेवहैं फिर नई योजना बनेगी और करोड़ों में लाखों की लूट पाट होगी । सरकारी  राशन दुकानों को लें एक भी डीलर ईमानदारी से अपने कार्य संपादित नहीं कर रहे उन पर किसी की नजर नहीं जितने बड़े विभाग उतने बड़े छेद उन्हें कौन बंद करेगा ।अफसर कार्यालय सौर मीटिंग में व्यस्त फिर भी जनता दौड़कर जाती है फिर दलाल लगते हैं फिर कार्य होता है ये कौन देखेगा सबसे बड़ी समस्या राज्य से लेकर प्रखंड तक यही है ।  मुख्य मुख्य जगहों पर मूर्तियों को  स्थापित कर अपनी सत्ता अपना पावर  को दर्शाए जाते हैं लाखों  करोड़ों सरकारी मदद  लेकर जगह जगह स्थापित किए गए हैं ।कुछ कमी नहीं है कमी है तो भेड़ बकरियां की तरह जीवन जी रहे आम  जनता के सुविधाओं को लेकर ।जिसे कोई देख नहीं पा रहा न जनसेवक न  प्रतिनिधि न पदाधिकारी । इस क्षेत्र में  जमीन बिकती नहीं है बहुत कम जमीन रजिस्ट्री की है और शेष जमीन   विश्वास दबंगता कुछ कागजी आधार पर बिकती है जिसे वकीलों के जरिए  एफिडेविट के द्वारा बिकते हैं फिर वही वकील उन्हें कोर्ट में अमान्य कर देते हैं झूठ मुकदमे बाजी बाहु बलि माफिया इसमें बहुत आगे हैं  और उनकी अपनी  सत्ता चलती है ।बगैर दलालों के इस एरिया में जमीन  बेचना और खरीदना दोनों मुश्किल कार्य है ।

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झारखंड का सबसे नायाब क्षेत्र संथाल परगना प्रमंडल ।
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